गोतीर्थधाम एक पवित्र ट्रस्ट है, जो भारत की देशी गायों की नस्लों के संरक्षण, पुनर्जीवन और संवर्धन के लिए समर्पित है। ये हमारी सांस्कृतिक विरासत के सजीव प्रतीक हैं। सनातन धर्म और निःस्वार्थ सेवा के मूल्यों पर आधारित हमारी दृष्टि गोमाता के कल्याण के महत्त्व पर केंद्रित है, जो किसानों की समृद्धि से जुड़ी है। साथ ही, इसकी भूमि की उर्वरता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उत्तराखंड की आध्यात्मिक भूमि से संचालित होकर, हम देशभर में देशी नस्लों के संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए किसानों, ग्रामीण समुदायों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर कार्य करते हैं। हमारे प्रयास केवल संरक्षण तक ही सीमित नहीं हैं अपितु एक ऐसी जीवन-प्रणाली के उत्थान से जुड़े हैं जो सतत विकास, सांकृतिक मूल्यों और सामूहिक कल्याण को सम्पोषित करते हैं।
ट्रस्ट, गोसेवा का समर्थन करते हुए देशी गायों से जुड़े संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और उनके निरंतर सतत उपयोग के लिए कार्य करता है। इसके साथ ही, यह जैविक खेती, ग्रामीण विकास और पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय है। ट्रस्ट पतंजलि से प्रेरित संगठनों के साथ निकट सहयोग में गौ-आधारित अनुसंधान और प्राकृतिक खेती की विधियों को प्रोत्साहित करता है।
ये गोतीर्थधाम की प्रेरणा और मार्गदर्शन के आधार हैं। हमारे सभी प्रयास धर्म से जुड़े हुए हैं, जिनका उद्देश्य गोमाता, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य स्थापित करना है।